गुरुवार, 26 मार्च 2009

सूरजकुंड मेले में स्वच्छता का रखा गया है ध्यान भी़ड़ की आपाधापी में हर इंसान को हमेशा जो एक चीज खटकती है, वो है साफ-सफाई का अभाव। भीड़ का रेला जो थमता नहीं दिखता, वो कहीं भी कोई भी आयोजन हो, ऐसा लगता है सारी सुविधाओ के बाद भी काई चीज अधुरी रह गई है। इन सब बातों को यदि सूरजकुंड मेला से जोड़ कर देखें तो यहां बात बिल्कुल उलट जाएगी। हरियाणा राज्य में 15 दिनों से चल रहे इस मेले में हर रोज करीब 50 हजार की संख्या में लोग आ रहे हैं। मेले की प्रसिद्दि का अनुमान इससे भी लगाया जा सकता है कि इस वर्ष से दक्षिण एशियाई क्षेत्रिय राष्ट्र जैसे अफगानिस्तान, श्रीलंका, नेपाल, थाईलैंड जैसे राष्ट्र शिरकत कर रहे हैं। साथ ही भारत के अधिकांश राज्यों से कई कारीगर इसमें अपनी कला का प्रर्दशन कर रहे हैं। कहीे लोकनृत्य है, तो कहीे प्राचीन कला कठपुतली का नृत्य, कहीे आदिवासी राज्य क्षेत्र के लोग बड़चढ़ कर अपना योगदान दे रहे हंै। मध्यप्रदेश, तमिलनाडु, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, बिहार आदि अन्य राज्यों से कुशल हस्तशिल्पी इस मेले में ‘ाामिल हुए हैं। निश्चित रुप से कला का यह मेला संगम स्थल बना हुआ है और लोगों के आर्कषण का केन्द्र भी। मगर सिक्के का दूसरा पहलू भी होता है। इस अदभुत साम´जस्य के पीछे योग्य प्रबंधन का। साथ ही इस प्रबंधन में सबसे ज्यादा ध्यान देने वाला क्षेत्र है, पूरे मेला परिसर की साफ-सफाई इस लिहाज जहां तक हमने देखा, सभी जगह साफ-सफाई का भरपूर ध्यान रखा जा रहा था। जहां हर रोज 50,000 की संख्या में लोग आ रहे हैं, वहां इतनी सफाई बरकरार रखना सही मायने में चुनौतीपूर्ण है। लेकिन मेला प्रबंधकों ने इस पर खास ध्यान रखा था। सभी जगह कू़ड़ेदान रखे थे, इसके अलावा हर थोड़ी दूर पर सफाई कर्मचारी अपना योगदान दे रहे थे। खाने-पीने वाले स्टॉलों के आस-पास अधिक ध्यान रखा गया था। साफ-सफाई के मामलों में ‘ाौचालयों की चर्चा भी जरुरी है। इनमें बाहरी दीवारों पर ग्रामीण झलक दिखाने के लिए आर्कषक ढंग से लिपाई-पुताई की गई थी और रंगों से सजाया गया था। मेला परिसर में इतनी भारी संख्या में लोगों का आना-जाना अनवरत जारी था और मेला आयोजकों ने भी साफ-सफाई को लेकर चैकस प्रबंध कर रखा था।

4 टिप्‍पणियां:

गिरिजेश राव, Girijesh Rao ने कहा…

लेख का शीर्षक दे दिया करें और मात्रा की अशुद्धियों से बचें।

अच्छा लेख है। हरयाणा का प्रभाव जहाँ भी है वहाँ इस तरह के आयोजनों में सफाई रहती है। मैंने तीर्थ स्थानों में भी बेहतर सफाई पाई है।

अजय कुमार ने कहा…

हिंदी ब्लाग लेखन के लिये स्वागत और बधाई । अन्य ब्लागों को भी पढ़ें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देने का कष्ट करें

शशांक शुक्ला ने कहा…

शीर्षक देंगे तो लेख का हिंट मिल जायेगा,दूसरा मात्रात्मक गलतिया है लेकिन लिखने का बाद उसको चेक कर लिया करें ठीक हो जायेगी अच्छी जानकारी है

संगीता पुरी ने कहा…

इस नए ब्‍लॉग के साथ आपका हिन्‍दी ब्‍लॉग जगत में स्‍वागत है .. आपसे बहुत उम्‍मीद रहेगी हमें .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!